furkan

पिछले 3 वर्षों से बन्दूक के लाइसेंस के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे बागपत के फुरकान अहमद मुसलमान से हिन्दू बन गये है अब वो माथे पर लम्बा तिलक लगाते है तथा सिर पर चुटिया रखते है इतना ही नहीं वह खुद को फूल सिंह बुलाते हैं. यह सब सिर्फ इसलिए ताकि उनकी मुस्लिम छवि को हिंदू शक्ल दी जाए.

इंग्लिश डेली टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, फुरकान उर्फ़ फूल सिंह यह सब सिर्फ असलहे के लाइसेंस के लिए कर रहे हैं. बकौल फुरकान वह यह सब विरोध में कर रहे हैं क्योंकि उन्हें बन्दूक का लाइसेंस पिछले छ सालों से नहीं दिया जा रहा है. छ बच्चों के पिता फुरकान कहते हैं कि सिक्योरिटी की जॉब के लिए उन्होंने आर्म लाइसेंस के लिए 2010 में अप्लाई किया था. पिछले छ सालों में 10 जिलाधिकारी बदल गए लेकिन उनकी फाइल धूल फांकती रही.

फुरकान कहते हैं वे ई-रिक्शा चलाते हैं और पार्ट टाइम सिक्योरिटी का जॉब करके वह अपनी इनकम बढ़ाना चाहते हैं लेकिन प्रशासन उन्हें लाइसेंस ही नहीं दे रहा. फुरकान ने कहा कि एक आरटीआई रिप्लाई से उन्हें पता चला कि इस दौरान जिला प्रशासन ने 378 लोगों को लाइसेंस दिए लेकिन उनकी फाइल को किसी ने छुआ तक नहीं.

फुरकान ने कहा कि, “मैंने 2010 में पहली बार अप्लाई किया था. इसके बाद तीन सालों तक मैं दफ्तरों के चक्कर लगाता रहा. मुझे उस वक्त निराशा हाथ लगी जब मेरे द्वारा बार-बार जिलाधिकारियों और बाबुओं से गुहार लगाने के बाद 2014 में बताया गया कि मेरी फाइल खो गई है. इसके बाद मुझे दोबारा से पूरी प्रक्रिया करनी पड़ी जिसमें महीनों लगे. लेकिन एक बार फिर मुझे अभी तक लाइसेंस नहीं दिया गया.”

बागपत के जिलाधिकारी हरदेव शंकर तिवारी ने इस बाबत कहा, “यह प्रशासन के लिए अनिवार्यता नहीं है कि किसी को भी आर्म्स लाइसेंस दे दे. यह एक लम्बी जांच प्रक्रिया और आवेदक के जान के खतरे को देखकर दिया जाता है. हर कोई इसके लिए आवेदन नहीं कर सकता जैसा की फुरकान के मामले में है.”


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