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नई दिल्ली, 31 मई। मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव शुजात अली क़ादरी एक प्रतिनिधिमंडल के साथ आज से एक सप्ताह के लिए ईरान की आध्यात्मिक यात्रा पर निकल चुके हैं। आपको बता दें कि ईरान सूफ़ी इस्लाम के प्रमुख घरों में से एक है।

ईरान यात्रा पर रवाना होने से पहले दिल्ली के इंदिरा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पत्रकारों से बातचीत में क़ादरी ने कहाकि वह सबसे पहले ईरान की राजधानी तेहरान पहुँचेंगे जहाँ वह एक दिन के लिए रुकने के बाद सूफ़ी मत के सबसे महत्वपूर्ण स्थलों की यात्रा करेंगे। वह तुर्कमेनिस्तान की सरहद पर स्थित रज़वी ख़ुरासान प्रांत की राजधानी मशहद शहर जाएंगे जो सूफ़ी मतानुसार पवित्र शहर है। मशहद इमाम ग़ज़ाली का शहर है। ग़ज़ाली के इस्लामी अध्ययन, व्याख्या और दर्शन का कोई सानी नहीं है। मशहद में ही इमाम जाफ़र सादिक़ के शिष्य और महान् गणितज्ञ, ज्योतिषी, रसायनशास्त्री, खगोलविद्, भूगर्भशास्त्री, दार्शनिक, चिकित्सक, दवा विशेषज्ञ और अलजेबरा के जनक हज़रत जाबिर बिन हय्यान का शहर है। मशहद फ़ारसी के महान् कवि, दार्शनिक और शाहनामा के रचियता फ़िरदौसी और दार्शनिक अबुल फ़ज़ल बेहिक़ी का जन्मस्थल है। इसके अलावा कई धार्मिक नेता, दार्शनिक, खिलाड़ी और वैज्ञानिकों के शहर के तौर पर मशहद जाना जाता है।

वहाँ से शुजात क़ादरी सिमनान जाएंगे जो भारत के अंबेडकरनगर की किछौछा दरगाह के बाबा हज़रत मख़दूम अशरफ़ सिमनानी का मूल नगर है। हज़रत मख़दूम सिमनान के ही बादशाह थे लेकिन बाद में विरक्ति होने पर ईरान से निकले तो किछौछा में रुके और वहाँ सूफ़ी मत का प्रचार किया। सिमनान नाम के प्रांत का नाम इसकी राजधानी सिमनान के नाम पर ही पड़ा। उत्तरी ईरान में भूमध्य सागर के सरहदी शहर सिमनान को फ़ारसी के महान् कवि अलाउद्दौला सिमनानी के नाम से भी जाना जाता है। ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति हसन रूहानी भी सिमनान के रहने वाले हैं।

क़ादरी का हमदान और इसफ़हान शहर जाने का भी कार्यक्रम है जो दर्शन, चिकित्सा, औषधि विज्ञान, गणित, भूगर्भ, खगोल और इस्लामी फ़िक़ के महान् चिंतक अबू अली अल हुसैन बिन अब्दुल्लाह बिन अलहसन इब्न अली इब्न सीना उर्फ़ बू अली सीना या इब्न सीना के नाम से जाना जाता है। इब्न सीना ने 450 पुस्तकें लिखी हैं जिसमें से 240 सुरक्षित हैं। इन 240 में से 150 पुस्तकें दर्शन और 40 चिकित्सा विज्ञान पर हैं। अंग्रेज़ी में ‘अवीसीना’ के नाम से मशहूर इस महान् चिकित्सक की मूल पुस्तकों पर ही आधुनिक चिकित्सा विज्ञान खड़ा है। एक सप्ताह की यात्रा के बाद शुजात क़ादरी 8 जून को दिल्ली लौट आएंगे।


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