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नई दिल्ली | भारत में कुल तेल खपत का 80 प्रतिशत तेल आयात किया जाता है. इसी वजह से भारत में उपभोक्ताओ को तेल की अधिक कीमत चुकानी पड़ती है. एशिया में होने की वजह से भारत को कच्चा तेल अमेरिका और यूरोप के देशो के मुकाबले महंगा मिलता है. सारे एशियाई देशो के साथ ऐसा बर्ताव होता है लेकिन इसके खिलाफ कोई आवाज नही उठाता.

दरअसल सभी तेल उत्पादक खाड़ी देश एशियाई देशो को कच्चा तेल महंगा बेचते है. अमेरिका और यूरोप देशो के मुकाबले भारत और अन्य एशियाई देशो को करीब 6 डॉलर अतरिक्त चुकाना पड़ता है. खाड़ी देशो में इस शुल्क को एशियन प्रीमियम कहा जाता है. हैरत की बात यह है की सभी एशियाई देश इस बात को जानते है लेकिन कोई इसके खिलाफ कुछ नही बोलता.

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भारत में सबसे पहले 2004 में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने इस मुद्दे को उठाया था. इसके बाद साल 2009 में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने इस बात को आगे बढ़ाते हुए सऊदी अरब के प्रिंस से इस बारे में बात की थी. दरअसल एशियन प्रीमियम को कोई भी तेल उत्पादक खाड़ी देश वैध रूप से नही दिखाता इस वजह से इस बारे में कोई अधिकारिक सबूत किसी भी देश के पास नही है.

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मशहूर पत्रकार राजीव जायसवाल की किताब ‘ द लोबिस्ट- अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ गैस , आयल एंड एनर्जी सेक्टर’ में खुलासा किया गया है की साल 2009 में जब मनमोहन सिंह और पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा सऊदी अरब के दौरे पर थे तब मुरली देवड़ा ने सऊदी प्रिंस के सामने एशियन प्रीमियम की बात रखी थी जिसके बारे में सऊदी अरब प्रिंस ने अनभिज्ञता जताई थी. वही इस मुद्दे को सऊदी प्रिंस के सामने उठाने पर मनमोहन सिंह ने मुरली देवड़ा को काफी डांटा भी था.

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