नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर तलत अहमद देश के अग्रणी वैज्ञानिकों में शुमार किए जाते हैं। विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्य के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। जामिया के कुलपति के रूप में अपने लगभग दो साल के कार्यकाल में उन्होंने ढांचागत विकास सहित अनुसंधान कार्यों पर विशेष ध्यान दिया है और कई नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं। वो जामिया को विशेष रूप से अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने का इरादा रखते हैं। urdu.pradesh18.com से बातचीत में उन्होंने विश्वविद्यालय में अपनी उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं और जामिया के अल्पसंख्यक किरदार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की। पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:

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सवाल: जामिया मिलिया इस्लामिया में कुलपति के रूप में आपकी क्या उपलब्धियां रही हैं?

जवाबः दिल्ली में शिक्षा प्राप्ति के लिए ज्यादातर छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय या जेएनयू का रुख करते थे। मगर जब से मैं कुलपति बना हूं मेरी कोशिश है कि मैं जामिया को छात्रों में ज्यादा मकबूल बनाऊं। यही कारण है कि आप देखेंगे कि जामिया में काफी कुछ किया जा रहा है, बल्कि विश्वविद्यालय में तो कई नई बातें ऐसी हुईं जो दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू में नहीं हुईं।  उदाहरण के लिए, शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय मिशन, कौशल केंद्र, सामुदायिक कॉलेज जैसे कार्यक्रम केवल इसी विश्वविद्यालय में शुरू हुए। इसी तरह से ज्ञान (ग्लोबल इनीशिएटिव ऑनलाइन एकेडमिक नेटवर्क) कार्यक्रम की बात करें, तो सबसे ज्यादा  कार्यक्रम यहीं हैं। शैक्षिक वर्ष 2015- 2016 से चार सौ बिस्तर वाला हॉस्टल छात्राओं के लिए तैयार है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक छात्राओं के लिए एक हॉस्टल और इसी तरह छात्रों के लिए एक हॉस्टल का निर्माण जारी है। महिलाओं के लिए एक कैंटीन शुरू की गई है, जिसका इंतजाम महिलाओं के ही हाथ है।

सवाल: आप खुद एक बड़े रिसर्च स्कॉलर हैं। विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा में कोई ऐसा कार्यक्रम शुरू किया है जिससे रिसर्च के छात्रों को लाभ हो?

उत्तर: चूंकि मेरा संबंध शोध कार्यों से रहा है, लोग मुझे मेरे शोध कार्यों से अधिक जानते हैं। इसलिए इस पर हमने  विशेष ध्यान दिया है। दरअसल फैलोशिप के लिए छात्र यहां आवेदन नहीं देते थे। हमने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि आप लोग परियोजना लाएं। इसके लिए आवेदन करें। इस सिलसिले में हमने नया पद डीन रिसर्च और डीन एकेडिमिस्ट का बनाया है। उनके द्वारा छात्रों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे अपने विश्वविद्यालय के लिए फंडेड परियोजना लाएं। साथ में बच्चों के लिए फैलोशिप लाएं। क्योंकि केवल पढ़ाई से कुछ नहीं होता है। विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ शोध भी अनिवार्य है। दूसरी बात ये कि हमने अन्य विश्वविद्यालयों के साथ संपर्क बढ़ाना शुरू किया है। पहले जामिया मिलिया और जामिया हमदर्द के बीच संपर्क बढ़ाया। क्योंकि कुछ पाठ्यक्रम उनके यहां ऐसे हैं जो हमारे यहां नहीं हैं और कुछ पाठ्यक्रम हमारे यहां हैं, जो उनके यहां नहीं हैं। उनके यहां यूनानी मेडीसिन का पूरा सिस्टम है जो आयुष के तहत आता है। अरबी और फारसी भाषाओं में यूनानी उपचार के जो प्राचीन पर्चे हैं, हमने उनसे कहा है कि हमारे यहां अरबी विभाग और फारसी विभाग वालों से उनके अनुवाद करवा सकते हैं। इससे यूनानी मेडिसिन में नई चीजों की खोज होगी। इसी के साथ डिजास्टर मैनेजमेंट में हम एक नया विभाग शुरू करने जा रहे हैं। हमने  डिप्लोमा पाठ्यक्रम पहले से ही शुरू कर दिया है। दूसरी बात ये है कि विदेशों के विश्वविद्यालयों से भी हम संपर्क में हैं। अर्जेंटीना, यूरोप और स्विट्जरलैंड के विशेषज्ञ यहां आ चुके हैं और ये सिलसिला बरकरार रहेगा। इससे यहां के छात्रों को उनके साथ काम करने और कुछ सीखने का मौका मिलेगा।

सवाल: आपने जामिया में यूनानी मेडिसन की बात कही, जबकि कुलपति का पद संभालने के बाद आपने जामिया में मेडिकल कॉलेज खोलने का वादा किया था। मेरा मतलब एमबीबीएस आदि से है?

जवाबः हम ये नहीं कह रहे हैं कि हम मेडिकल कॉलेज नहीं खोलेंगे। इसके लिए हमें सबसे पहले जमीन की समस्या हल करनी होगी। हम जमीन  के लिए दिल्ली और यूपी सरकार के साथ संपर्क में हैं और सुप्रीम कोर्ट ने भी दोनों से इस समस्या को हल करने को कहा है। इस दिशा में प्रयास जारी हैं, एक बार जब जमीन मिल जाएगी तो मेडिकल कॉलेज खोलने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। हमें पूरी उम्मीद है कि इसमें हमें सफलता मिलेगी।

सवाल: अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अभी हाल ही में जामिया मिलिया इस्लामिया के अल्पसंख्यक दर्जे पर सवाल खड़े किए हैं। क्या आप की नजर में जामिया का अल्पसंख्यक दर्जा खतरे में है?

उत्तर: मेरी नजर में जामिया के अल्पसंख्यक किरदार को कोई खतरा नहीं है। यह मामला अदालत में विचाराधीन है। आयोग द्वारा जामिया को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है और सरकार ने संसद के एक अधिनियम के तहत आयोग का गठन किया था। आयोग को ये अधिकार दिया गया था कि समीक्षा कर वो अल्पसंख्यक का दर्जा दे। इन संस्थाओं में जैन, सिख और ईसाइयों के भी कई संस्थान हैं जिन्हें अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया। अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त करने के लिए संसद से इसे मंजूरी लेनी होगी और मुझे नहीं लगता कि संसद अभी इस स्थिति में है कि वह इस तरह का कोई कदम उठाए। इसलिए हम लोगों को इस से परेशान होने की जरूरत नहीं है।

सवाल: जेएनयू विवाद पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

जवाब: जेएनयू इस विवाद से जल्द ही बाहर निकल आएगा। वहां हालात सामान्य हो जाएंगे। वहां जो भी स्थिति है, वो एक अस्थायी स्थिति है।

सवाल: भविष्य में विश्वविद्यालय के लिए आपकी क्या योजना है?

जवाब: हमारे जो युवा बच्चे विदेशों में हैं और जो बहुत बुद्धिमान हैं, उनके लिए हम यहां एक इंटर डिसिप्लिनरी एडवांस रिसर्च सेंटर खोलना चाहते हैं। इस सेंटर में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ रखे जाएंगे ताकि ये आपस में मिलकर कुछ नई चीजें खोज सकें।

सवाल: वर्ष 2020 में जामिया की स्थापना के सौ साल पूरे होने जा रहे हैं। इसे लेकर कोई तैयारी या कोई कार्यक्रम?

जवाब: 2020 के लिए हम एक विजन दस्तावेज तैयार कर रहे हैं जिसके लिए वरिष्ठ प्रोफेसर और पुडुचेरी और कश्मीर विश्वविद्यालय में कुलपति रहे प्रोफेसर जे ए के तरीन को हमने अध्यक्ष बनाया है। इसमें दूसरे वरिष्ठ सदस्य भी हैं। ये सब मिलकर इस पर काम कर रहे हैं। (ibnlive)


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