क्या आप यक़ीन करेंगे कि देश के सबसे बड़े हिंदी अख़बार, दैनिक जागरण का एक डिप्टी एडिटर ‘देशद्रोहियों’ का कैदियो से बलात्कार कराना चाहता है। उसकी भुजाएँ फड़क रही हैं और वह अपने फेसबुक पर जैसी उलटी कर रहा है, वह बताता है कि भारत कैसे ‘देशभक्तों’ के चंगुल में फँस गया है।

anil jagran

वैसे तो किसी पत्रकार से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जाती। संपादकों का काम ही कि ऐसे किसी विचलन से अख़बार को बचाना। लेकिन जागरण के डिप्टी एडिटर पद को सुशोभित कर रहा डा.अनिल दीक्षित (सोचिये, डाक्टर भी हैं, यानी किसी विषय में पीएच.डी की होगी) उमर खालिद और अनिर्वाण भट्टाचार्य के साथ ऐसा ही कराना चाहता है।

इस दिमाग़ी मरीज़ ‘डॉक्टर’ को यह भी पता नहीं है कि अगर कहीं जुर्म हुआ है तो उसे सज़ा देने का काम अदालतों का है । और भारतीय अदालतें तालिबानी या खाप पंचायतें नहीं है। हिंदी का दुर्भाग्य ही है कि ऐसे अख़बार और पत्रकार शिखर पर हैं। आप ख़ुद पढ़कर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इसके दिमाग़ में कैसा ज़हर भरा है। दंगाई पत्रकारों की दिमाग़ी हालत का एक्स-रे है यह पोस्ट। mediavigil


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