is-took-responsibility-of-attack-on-shiyas-mosqueवाशिंगटन। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने आगाह किया है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट इस वर्ष अमेरिका में हमले कर सकता है। आतंकी छोटे समूहों में आकर विभिन्न ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।अमेरिकी सीनेट के सामने प्रमाण पेश करते हुए राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी के निदेशक जेम्स क्लैपर और अन्य अधिकारियों ने कहा कि आईएस का खतरा निश्चित रूप से रहेगा। वे विश्र्व में विभिन्न ठिकानों पर स्वयं हमले कर सकते हैं या अन्य को प्रेरित, निर्देशित कर सकते हैं।अमेरिकी एजेंसी के एक अन्य निदेशक विंसेंट स्टीवर्ट ने कहा कि ऐसी आशंका है कि आईएस पहले यूरोप पर कई हमले करने के बाद अमेरिका में ठिकानों को लक्ष्य बना सकते हैं। आतंकियों की प्राथमिकता स्वयं हमले की ही रहने की संभावना है।

क्लैपर ने कहा कि इस्लामी स्टेट से दुश्मनी रखने वाले अलकायदा से भी अमेरिका को खतरा रहेगा। इसके अलावा देश को चीन, रूस और उत्तर कोरिया से साइबर खतरे का सामने करने के लिए तैयार रहना होगा।उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है, अगले कुछ माह में वह छोटे परमाणु हथियार बेचने की स्थिति में भी आ सकता है, तब चिंताएं और बढ़ सकती हैं। सुरक्षा से जुड़ा यह तथ्य भी अहम है कि उत्तर कोरिया विश्र्व भर की चेतावनी के बावजूद रॉकेट का प्रक्षेपण कर चुका है।
दक्षिण एशिया में बढ़ रहा आईएस का खतरा
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खतरे को लेकर आगाह किया है। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान में तहरीक-ए-खिलाफत के जरिये दक्षिण एशिया में अपना जाल फैला रहा है। एक रिपोर्ट में बान की ने कहा, “आईएस के हालिया विस्तार का प्रभाव पूरे पश्चिम व उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया पर देखने को मिलता है। यह इसके खतरे की गंभीरता को दर्शाता है जो महज 18 महीने में उभरा है।”
यह रिपोर्ट सुरक्षा परिषद में आईएस से उत्पन्न खतरे को लेकर हुई एक चर्चा के दौरान पेश की गई। इसमें महासचिव ने बताया कि आईएस अफगानिस्तान और पाकिस्तान में लगातार समर्थकों का नेटवर्क विकसित कर रहा है जो इसके नाम पर हमले कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि आईएस के एक समूह “खोरासान प्रांत” ने 13 जनवरी को बयान जारी कर अफगानिस्तान में पाकिस्तान के वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी। यह समूह पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सक्रिय है।
बान की ने कहा, “इसके अलावा सीरिया में इस्लामिक यूथ शूरा काउंसिल, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक, लीबिया में लेवेंट लीबिया प्रांत, ट्यूनीशिया में मुजाहिदीन ऑफ कैरोन व जुंद अल-खिलाफत, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उजबेकिस्तान, पाकिस्तान में तहरीक-ए-खिलाफत और फिलीपींस में अंसार अल-खिलाफत जैसे आतंकी उसके प्रति निष्ठा दर्शाते हैं।


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