भाजपा आलाकमान ने हरियाणा में पैदा हुए हालात और जाट आंदोलन को शांत करने की कमान अपने हाथों में ले ली है। जाट आंदोलन के उग्र होने के बाद पार्टी के शीर्ष स्तर पर यह माना जा रहा है कि सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर स्थितियों को संभाल पाने में नाकाम रहे हैं। उनकी ओर से अंतिम दौर में सर्वदलीय बैठक सरीखे कदम उठाने की पहल हुई। जबकि मामला आगे निकल चुका था। इसलिए अब खुद भाजपा आलाकमान को मोर्चे पर उतरना पड़ा है।

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चंडीगढ़ से ज्यादा दिल्ली में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर गतिविधियां तेज रहीं। हालांकि प्रदेश भाजपा प्रभारी अनिल जैन ने राज्य सरकार की विफलता को खारिज किया है। जैन ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री लगातार जाट नेताओं से चर्चा कर उनकी एक-एक बात मानते रहे हैं। मगर आंदोलन के एकाएक उग्र हो जाने के वजहों को लेकर जैन भी स्पष्ट नहीं है।
जबकि सूत्रों की मानें तो डेढ़ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात के बाद जाट नेता आरक्षण संबंधी सरकार के प्रयास से संतुष्ट थे। लेकिन एकाएक उनके व्यवहार और आंदोलन में आई तल्खी की वजह मुख्यमंत्री खट्टर से उनकी संवादहीनता को माना जा रहा है। बल्कि आलाकमान को इस बात की भनक भी लगी है कि जाट नेताओं के खिलाफ जहर उगल रहे सांसद राजकुमार सैनी को परदे के पीछे खट्टर का समर्थन प्राप्त है। यही वजह है कि सैनी पर अनुशासन का चाबुक चलाने में पार्टी नेतृत्व ने तनीक भी देरी नहीं की।
दरअसल जाटों की अहमियत भाजपा को बखूबी पता है। हरियाणा में बेशक चुनाव देर से है। लेकिन यूपी में अगले वर्ष विधानसभा के चुनाव हैं। यूपी विधानसभा चुनाव के सियासी अहमियत को समझते हुए भाजपा आलाकमान जाटों की नाराजगी झेलने के मूड में नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इसे ध्यान में रखते हुए ही केंद्र सरकार में शामिल पार्टी के कुछ जाट नेता बीते एक वर्ष से खट्टर को जाट आरक्षण को लेकर आगाह कर रहे थे।
मगर खट्टर का रुख उन्हें रास नहीं आया। इसके बावजूद उक्त नेता अपने स्तर पर केंद्र सरकार और भाजपा के शीर्ष नेताओं से भी मामले को लेकर लगातार संपर्क में थे। सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि जाट आरक्षण का मामला समाधान के अंतिम दौर में पहुंच गया था। पिछले आठ माह से भाजपा के कुछ शीर्ष नेता हरियाणा के अंादोलनकारी जाट नेताओं पर अपने तरीके से काम कर रहे थे।
इस कवायद में बीते एक-डेढ़ माह पहले ही इन नेताओं की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से करवाई गई थी। पीएम और शाह से मिलने के बाद ये नेता बेहद संतुष्ट थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि उनकी आरक्षण की उनकी मांग जल्द पूरी होगी। मगर प्रदेश सरकार के साथ उनकी संवादहीनता के वजह से आंदोलन उग्र हो चला है। (hindkhabar)


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