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गांव झंडा गुज्जरां के लिए सोमवार का दिन अपने बेटे ऑनरेरी कैप्टन फतेह सिंह की कुर्बानी पर गर्व करने वाला रहा। पूरे गांव का सीना उस समय चौड़ा हो गया, जब शहीद की 25 साल की बेटी मधु ने पिता की अर्थी को कंधा देकर साबित कर दिया कि इस देश की बेटियां भी बहादुर हैं। दोपहर करीब 2 बजे जैसे ही शहीद की पार्थिव शरीर गांव पहुंचा उनकी चिता को उनके बड़े बेटे ने मुखाग्नि दी। इस दौरान सिख रेजिमेंट और तिबड़ी कैंट से पहुंचे 86 ब्रिगेड के जवानों ने शस्त्र उलटे कर शहीद को सलामी दी।

शहीद के छोटे भाई सुरजीत सिंह ने कहा कि फतेह सिंह बेटी मधुबाला की शादी की तैयारी कर रहे थे। किसी अच्छे लड़के की तलाश में थे। लेकिन उनकी बेटी की शादी की इच्छा मन में ही रह गई। पूरे गांव को अपने वीर बेटे की शहादत पर नाज है। उनका भाई सदा उनके साथ खड़ा रहता था। शहीद फतेह सिंह ने कुछ दिन पहले ही अपनी फोटो बड़ी करने के लिए देकर आया था। उसने अपनी बहन से कहा था कि मेरी फोटो पर मिट्टी नहीं होनी चाहिए। सोमवार को फतेह सिंह की बहनें भाई की इसी बात को याद कर बार-बार बेसुध सी हो जाती थीं। शहीद फतेह सिंह का शव लेकर उनके साथी जवान जैसे ही गांव पहुंचे, गांव में मातम पसर गया। पूरे गांव के लोगों ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी।

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शहीद कैप्टन फतेह सिंह की बेटी मधु ने रोते हुए कहा कि पापा ने कहा था कि हमेशा सच बोलना और सच्चाई के रास्ते पर चलना। जो पापा ने किया है, कोई नहीं कर सकता। मधु ने बताया कि वह महु (मध्यप्रदेश) में परिवार के साथ रहती है। करीब 10 दिन पहले वह स्कूल में छुट्टियां पडऩे के बाद मां और छोटे भाई नितिन के साथ पिता के पास एयरफोर्स स्टेशन पठानकोट में आई थी। आतंकी हमले के दौरान वह मां और भाई के साथ घर में थी। पापा रात करीब दो बजे गए। उन्हें रविवार शाम पिता की शहादत की जानकारी मिली।

शहीद फतेह सिंह के बड़े बेटे गुरदीप सिंह दीपू राणा, 15-डोगरा रेजिमेंट असम में तैनात हैं। उन्हें पिता की शहादत के बारे में कुछ नहीं बताया गया था। वह सोमवार सुबह जैसे ही गांव पहुंचे तो उन्हें पिता की शहादत की जानकारी मिली। दीपू ने बताया कि वह पिता की ही प्रेरणा से देश की सेवा के लिए इंडियन आर्मी में भर्ती हुए हैं। पिता ने बचपन से ही उन्हें सेना में भर्ती होने की प्रेरणा दी। वह कहा करते थे कि बेटा देश की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता।


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