दिल्ली

कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए के शासन काल के दौरान साल 2014 के पहले पांच महीनों में सांप्रदायिक हिंसा की जितनी घटनाएं हुई थीं, उससे 25 % ज्यादा घटनाएं मोदी सरकार के तहत 2015 के पहले पांच महीनों में हुई हैं। मोदी सरकार ने पिछले साल इस बात के लिए अपनी पीठ ठोकी थी कि उसके शासन संभालने के बाद देश में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं घटी थीं। लेकिन, इस साल शुरुआती 5 महीने के आंकड़े पर विरोधी सरकार को घेरने की कोशिश कर सकते हैं।

गृह मंत्रालय की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में इस साल जनवरी से मई के बीच सांप्रदायिक हिंसा की 287 घटनाएं हुईं। मंत्रालय के आंकड़े मुताबिक, पिछले साल इसी दौरान ऐसी 232 घटनाएं हुई थीं। तब यूपीए शासन था। इन आंकड़ों से यूपीए और एनडीए सरकारों के दौरान देश में सांप्रदायिकता की तस्वीर की सीधी तुलना की जा सकती है।

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पिछले साल के इन पांच महीनों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं ने 26 लोगों की जान ली थी, वहीं 2015 के शुरुआती पांच महीनों में 43 लोगों को ऐसी घटनाओं में मार डाला गया। आंकड़ों से पता चलता है कि ऐसी घटनाओं में घायल होने वालों की संख्या भी 701 से बढ़कर 961 हो गई।

गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने इसका ठीकरा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की सरकारों पर फोड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि इन राज्यों की सरकारों ने हिंसा की घटनाओं पर काबू पाने की पर्याप्त कोशिशें नहीं कीं।

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मंगलवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र से पहले आए ये आंकड़े केंद्र की दिक्कत बढ़ा सकते हैं। गृह मंत्रालय ने पिछले साल अपनी पीठ इस बात के लिए ठोकी थी कि 2013 की तुलना में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में 25 पर्सेंट कमी आई और 823 के मुकाबले 2014 में ऐसी घटनाओं की संख्या 644 रही। साथ ही, ऐसी घटनाओं में मरने वालों की संख्या भी 133 से कम होकर 95 पर आ गई थी। 2013 में सांप्रदायिक हिंसा में 2,269 लोग घायल हुए थे, जबकि 2014 में आंकड़ा 1,921 का रहा।

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ताजा आंकड़ों पर गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि इस साल मई तक देश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। हालांकि 25 मई को हरियाणा में बल्लभगढ़ के अटाली गांव में सांप्रदायिक संघर्ष हुआ था और 400 से ज्यादा मुसलमानों को घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। इसी तरह, पश्चिम बंगाल के नदिया में मई में एक घटना हुई, जिसमें एक धार्मिक जुलूस में बाधा डालने की घटना के बाद हुए संघर्ष में 3 हिंदू मारे गए थे। जुलाई में हरियाणा के पलवल में सांप्रदायिक हिंसा की घटना सामने आई थी।


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