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नई दिल्ली | नोट बंदी को,  कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक के तौर पर प्रचारित कर रही मोदी सरकार , अब एक और योजना लेकर आई है. इस योजना में कोई भी अपने कालेधन को सफ़ेद कर सकेगा. इसके लिए आज संसद में संसोधन बिल पेश किया गया. संसोधन के बाद किसी भी व्यक्ति को यह छूट मिल जायेगी की वो अपना कालाधन 50 फीसदी टैक्स देकर सफ़ेद कर सकेगा.

सोमवार को लोकसभा में आयकर कानून में संसोधन को लेकर विधेयक पेश किया गया. इस संसोधन के बाद आयकर कानून में काफी फेरबदल हो जाएगा. अब तक किसी भी घोषित संपत्ति पर सारे टैक्स मिलाकर 34 फीसदी टैक्स लगता था. अब अगर कोई अपनी अघोषित संपत्ति को घोषित करता है तो उसको 50 फीसदी टैक्स देना होगा. इस 50 फीसदी में 30 फीसदी टैक्स, 10 फीसदी जुर्माना और 10 फीसदी गरीब कल्याण सेस है.

हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने नोट बंदी का एलान करते हुए कहा था की उन्होंने कालाधन रखने वालो को एक मौका दिया था लेकिन अब उन्हें कोई मौका नही मिलेगा. उनसे आजादी के बाद से पूरा हिसाब लिया जाएगा. मोदी ने नोट बंदी को कालेधन के खिलाफ आर पार की लड़ाई बताया था. लेकिन 20 दिन के अन्दर ही मोदी सरकार कालेधन वालो को एक और मौका देती दिखाई दे रही है.

इस योजना के बाद नोट बंदी बेमानी से लगने लगी है. क्योकि अगर यही योजना लानी थी तो नोट बंदी की जरुरत क्या थी. नोट बंदी का मकसद ही अगर कालेधन को बाहर लाना था तो इस योजना का क्या मकसद है? 30 दिसम्बर के बाद तो वो सारा धन जो बैंक नही पहुंचा वो रद्दी होना ही था, अब सरकार उस रद्दी को 50 फीसदी टैक्स लेकर वापिस मूल्य देना चाहती है.

हालांकि बिल में एक प्रावधान उनके लिए भी है जो इस योजना के आने के बाद भी अपनी समाप्ति घोषित नही करता है. पकडे जाने पर ऐसे लोगो के ऊपर 85 फीसदी टैक्स लगेगा. वही अगर कोई व्यक्ति आयकर विभाग को बताकर बैंक में कालाधन जमा करता है तो उसको 50 फीसदी टैक्स काटकर बाकी बची राशी का 25 फीसदी वापिस कर दिया जाएगा. वही बाकी बची 25 फीसदी राशी 4 साल बाद वापिस मिलेगी, वो भी बिना ब्याज राशी के.

चलिए एक गणित आपको समझाते है . सरकार ने कुल 14 लाख करोड़ की करेंसी बंद कर दी. सरकार इतनी ही रकम की नयी करेंसी जारी कर रही है. अब अगर बैंक में 10 लाख करोड़ रूपए जमा किये जाते है तब सरकार के पास कुल छापी हुई करेंसी 14 लाख करोड़ होगी. ऐसे में सरकार के पास 4 लाख करोड़ बच जायेंगे. जिनको माना जा सकता है की यह वो कालाधन है जो लोगो का बेकार हो गया और वो उसे बैंक में जमा नही कर सके. ऐसे में इस योजना को लाना समझ से परे है.


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