नई दिल्ली – अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) से पहले एसोचैम द्वारा किए गए एक सर्वे से पता चला है कि काम करने वाली ज्यादातर महिलाओं को मां बनने के बाद नौकरी छोड़नी पड़ती हैं। इसके बाद सबसे बड़े कारणों के रूप में वर्क प्लेस पर भेदभाव और शोषण हैं। विशेष रूप से यह महिलाएं प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाली हैं। सर्वे के मुताबिक 40 प्रतिशत महिलाएं अपने बच्चों को पालने के लिए यह फैसला लेती हैं और बाकी लैंगिक भेदभाव या उनके लिए असुरक्षित माहौल की वजह से जॉब छोड़ती हैं।

एसोसिएशन ने सर्वे के लिए करीबन 500 महिलाओं का सैम्पल लिया था, जिनमें करीबन 200 वर्किंग मदर्स थीं। काम छोड़ने की वजहों में काम करने का वक्त, देर तक बैठना, सैलरी में देरी, लैंगिक भेदभाव, काम की जगह पर शोषण, आगे पढ़ने के लिए या परिवार से जुड़े मसले आदि सभी शामिल हैं।

200 में से 80 वर्किंग मदर्स ने कहा कि बतौर मां आवश्यक जिम्मेदारियों और परिवार को पर्याप्त और अच्छा वक्त देने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ी। करीबन 30 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि काम की जगह पर शोषण (जैसे प्रमोशन न मिलना आदि) की वजह से उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके अलावा कई महिलाओं ने कहा कि अथॉरिटी से सहयोग न मिलने की वजह से उन्हें तकलीफ हुई और शिकायत करने पर उल्टा उन्हें ही शर्मसार होना पड़ा और इस वजह से नौकरी छोड़नी पड़ी। कई महिलाओं ने शिकायत की वर्क प्लेस पर महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल नहीं था और उनके संगठन इस मुद्दे पर विशेष ध्यान भी नहीं देते थे।


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