masood raza khan
सांकेतिक फोटो

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक बहुत सनसनी खबर वायरल हो रही है जहाँ एक मौलाना के शव को लेकर चर्चाये की जा रही है वहीँ यह बात सोचने पर मजबूर करती है की आखिर कैसे इतने दिनों तक कोई शव कब्र में सही हालत में रह सकता है. अधिक से अधिक एक महीने तक अगर तापमान ठंडा हो तो शव को सुरक्षित रखा जा सकता है लेकिन पीलीभीत जैसी गर्म जगह पर यह कल्पना कर पाना मुश्किल है.

पीलीभीत में एक मौलाना का शव 13 माह तक कब्र में दबा रहा, लेकिन उसे खरोंच तक नहीं आई। इतना ही नहीं कफन पर भी कोई दाग नहीं लगा था। इसे देखने वाले हैरान हैं और यह चर्चा का विषय बना हुआ है। मौलाना का शव कब्र से निकाला गया। परिजन पीलीभीत से त्रिलोकपुर थानाक्षेत्र के डोकम गांव में उनके शव का दोबारा अंतिम संस्कार करने जा रहे हैं।

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पीलीभीत के हशमत नगर दरगाह में आठ अक्टूबर 2015 को दफन किए गए मौलाना मसहूद रजा खां का शव मंगलवार रात कब्र से खोदकर निकाला गया तो शव को सुरक्षित देख हर कोई दंग रह गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मरहूम मौलाना के कफन में दाग तक नहीं। परिजन पीलीभीत से त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के डोकम अमया गांव में उनके मृत शरीर को लेकर मलंग बाबा के मजार के पास सुपुर्दे खाक करने के लिए लेकर आ रहे हैं। मरहूम मौलाना के जनाजे का दीदार करने के लिये देर रात तक सिद्धार्थनगर के डोमक अमया गांव में ग्रामीणों का हुजूम लगा रहा।

 पीलीभीत के मूल निवासी, सुन्नी मूवमेंट के बड़े क़यिद और आला हज़रत के खलीफा हजरत हशमत अली खान के साहेबजादे मौलाना मसउद रजा खां तकरीबन 20 वर्ष से बलरामपुर जिले के उतरौला में रह रहे थे। उनका आसपास के जनपदों से लेकर मुम्बई तक आना-जाना लगा रहता था। तथा दूर दूर तक उनके चाहने वाले मौजूद थे। ग्रामीणों के मुताबिक मरहूम मौलाना अक्टूबर 2015 में मुम्बई दीन की दावत देने गए हुए थे, जहां स्वास्थ्य खराब होने से 6 अक्टूबर 2015 कों उनका देहांत हो गया था।

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मुम्बई से शव लाकर आठ अक्टूबर 2015 को परिजनों ने पैतृक क्रबगाह पीलीभीत के हशमत नगर दरगाह में दफन कर दिया था। चर्चा के मुताबिक पिछले एक माह से मरहूम मौलाना की आत्मा परिजनों को स्वप्न दिखा रही थी कि उनके जनाजे को सिद्धार्थनगर जिले के त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के डोकम अमया गांव में स्थित मलंग बाबा के मजार के पास दफन किया जाए।

निरंतर आ रहे स्वप्न से परिजनों ने मरहूम मौलाना के कब्र को खोदवाया, तो तेरह माह बाद सुरक्षित शव देखकर वह अचम्भित हो गये। परिजनों के मुताबिक मरहूम मौलाना के शव में कहीं दाग तक नहीं लगा है। परिजन मौलाना के जानजे को लेकर डोकम अमया गांव के लिए निकल दिए हैं। मौलाना का जनाजा आने की खबर को लेकर सुबह से ही डोकम अमया गांव में इलाकाई लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है। मलंग बाबा के मजार पर उमड़ी भीड़ देर रात तक जनाजे के इंतजार में खड़ी रही। मौलाना का शव खबर भेजे जाने तक गांव नहीं पहुंचा था।

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यह खबर सुनने के बाद हर शख्स की जुबान से यही निकल रहा है

  • ज़मी मैली नही होती, ज़मन मैला नही होता 
  • मुहम्मद के गुलामो का कफ़न मैला नही होता

खबर के कुछ अंश पत्रिका.कॉम से लिए गये है 

 


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