बीजिंग। अच्छी मां बनना हर महिला का सपना होता है। वैसे तो \’ममता\’ महिलाओं का नैसर्गिक गुण है, लेकिन चीन में यह \’ममता\’ ट्रेनिंग सेंटर में सिखाई जाती है। महिलाएं गुडिय़ा की देखरेख कर अपने भावी बच्चे की परवरिश के गुण सीखती हैं। ट्रेनर बच्चों की नैपी बदलने से लेकर उन्हें दुलार करने, घुमाने-फिराने और उनके मनोभावों को समझने के लिए महिलाओं को अभ्यास कराते हैं।

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नई नीति ने दिया अवसर

चीन में दशकों बाद सेकंड चाइल्ड नीति को मंजूरी मिली है। कई महिलाएं अब अपने दूसरे बच्चे के लिए प्लान करने लगी हैं। ऐसे में कई ऐसे संस्थान खुल गए हैं, जो महिलाओं को उनके दूसरे बच्चे को बेहतर परवरिश देने के गुण सिखा रहे हैं।

क्या होता है ट्रेनिंग में

चीन में चल रहे इन कोचिंग क्लासेस में उन महिलाओं को प्रवेश दिया जाता है, जो बच्चे के लिए प्लान बना रही हैं। चीन की सरकार ने बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए अभिभावकों के लिए कई नियम बनाए हैं। ऐसे में नए माता-पिता बनने वाले दंपती के सामने कई मुश्किले आती हैं। ट्रेनिंग सेंटर पर बच्चों के शेड्यूल के अनुसार एक मां को क्या करना चाहिए और क्या नहीं का प्रायोगिक ज्ञान दिया जाता है, ताकि वे एक अच्छी मां की भूमिका का निर्वाह कर सकें।

साभार http://www.patrika.com/


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