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देश के बच्चो को शिक्षा का अधिकार देने के लिए यूपीए सरकार शिक्षा का अधिकार कानून लेकर आई थी. पर इसी कानून के तहत एक अजीब मामला सामने आया हैं जिसमे बेटे के स्थान पर पिता को स्कूल में दाखिला मिला हैं.

बेंगलुरू में रहने वाले रमेश (नाम परिवर्तन) ने आरटीई कानून के तहत बेटे के दाखिले के फार्म पर रमेश ने उम्मीदवार की जगह अपना नाम लिख दिया. इसके बाद उसने बेटे के दाखिल के लिए दूसरा फॉर्म भरा. जब स्कूल ने लॉटरी के जरिए ड्रॉ निकाला तो बेटे के स्थान पर पिता को स्कूल में दाखिल मिला. रमेश ने इस बारे में अधिकारियों को बताया कि किस तरीके से उसके बेटे को स्कूल में दाखिल नहीं मिला हैं.

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रमेश ने गलती से ये किया और अब वो विभाग से कह रहा है कि लॉटरी के लिए उसकी दूसरी अर्जी को स्वीकार कर लिया था. ये संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि केवल उन्हें लोगों को दूसरी लॉटरी में मोका मिलता है जिनका नाम पहले लॉटरी में नहीं आया हो. इतना ही नहीं दूसरे मोके में भी अर्जी खारिज होने के कई कारण हो सकते हैं.


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